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सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की विशेषताà¤à¤‚
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की विशेषताà¤à¤‚ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ होती हैं-
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ रोग से रहित होता है।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ दशायें सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करती हैं।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ में समरूपता तथा सामंजसà¥à¤¯à¤¤à¤¾ होती है।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• सà¤à¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ होती है।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में जैविकीय, मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• तथा सामाजिक कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं का समà¥à¤šà¤¿à¤¤ समनà¥à¤µà¤¯ होता है।
वैयकà¥à¤¤à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर पारिवारिक तथा सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है तथा वैयकà¥à¤¤à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का पारिवारिक à¤à¤µà¤‚ सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ शरीर तथा मन दोनों से है, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ दोनों ही सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने आवशà¥à¤¯à¤• है।
यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ दशा है जो सà¥à¤¥à¤¿à¤° नहीं रहती है। परनà¥à¤¤à¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¹à¤¿à¤¤ à¤à¤µà¤‚ बाहà¥à¤¯ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में संतà¥à¤²à¤¨ बना रहता है, यदि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अनावशà¥à¤¯à¤• रूप से बाधा न उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करें।
शरीर में आरोगà¥à¤¯ रहने तथा कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤ªà¥‚रà¥à¤¤à¤¿ करने की अà¤à¥‚तपूरà¥à¤µ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• तथा सामाजिक परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ से पूरà¥à¤£ समंजन है।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ दीरà¥à¤˜à¤¾à¤¯à¥ से है। अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ आजीवन वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ उचित आहार-विहार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन सà¥à¤–पूरà¥à¤µà¤• जी सकता है।
सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की आवशà¥à¤¯à¤•ता
संसार के सारे काम सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर ही निरà¥à¤à¤° है। केवल सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ मनà¥à¤·à¥à¤¯ ही धन कमा सकता है, जातीय सामाजिक, नैतिक, वैयकà¥à¤¤à¤¿à¤•, पारिवारिक और सब पà¥à¤°à¤•ार के करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का पालन कर सकता है, जीवन और संसार के सà¥à¤– उठा सकता है रोगी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ कà¥à¤› नहीं कर सकता । रोगी तो दूसरों पर बोठहै। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ही किसी परिवार समाज व राषà¥à¤Ÿà¥à¤° का
मेरà¥à¤¦à¤£à¥à¤¡ है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ही अपना व दूसरों का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ कर सकता है। सबसे बड़ा सà¥à¤– निरोगी काया को माना गया है।
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